Kahta Hai Tu Mujhe Bhagwan!- कहता है तू मुझे भगवान !
कहता है तू मुझे भगवान !
होकर मुझ में लीन
करता है तू करूणा की पुकार
विचलित मन को देता हूं समाधान
यही है मेरी पहचान
जियो और जीने दो !
कह रहा है तेरा भगवान
छोड़ जा धरा पर
अपने कदमों के निशान
होगा तेरा समग्र कल्याण
सृष्टि के कल्याण के लिए
चहुं दिशाओं में गूंजेगा मोहब्बत का गान
भरेगा विकास की उड़ान
मानवता की रक्षा करेगा विज्ञान
प्रकृति को मिलेगा शांति का वरदान
करूंगा तेरे और मेरे होने पे गुमान
इसलिए कहता है तू मुझे भगवान !
मौलिक रचयिता:– नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत)


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