Skip to main content

Posts

singmint

Charachar Hai Anam- चराचर है अनाम

चराचर है अनाम  कोख से निकला तू अपने – अपने पंथ से पाया तूने नाम नाम में संसार उलझा  देने लगा छोटे और बड़े का दर्जा  नाम है माया चराचर को अज्ञान ने उलझाया  प्रेम से कैसे रहा जाता है?  अनाम होकर अनाम का बन जा  एक रूप हुई जड़ और चेतना अनाम ने अनाम को दिया नाम दूर कर सके  चराचर की वेदना तमाम आज जल रहा है नाम लगा रहा है मिटाने के लिए दाम  नाम ने ही खोजा गोला और बारूद एक नाम दूसरे नाम को मिटाने के लिए बरसा रहा है बारूद एक दूसरे पर  सुबह और शाम नाम  को छोड़ बन्दे ! हो जा अब तू अनाम चराचर  बन जाएगा परम धाम अनाम में डूबकर  निद्रा में होकर लीन समझ रहा क्यों ? अपने को दीन  निद्रा के लिए  प्राणियों में हो रही सोने –चांदी और हीरे– मोती की सदियों से मानव द्वारा खोज बीन अनाम में मिल रही सब प्राणियों को निद्रा अनाम अनंत को क्यों खोज रहा तू कंदरा –कंदरा  सदियों से पीढ़ियां करती आई अनाम में अनन्त के दर्शन निद्रा में अनाम को  पाकर होती आई  है प्रसन्न  चराचर है अनाम जो अनाम हो दुनिया असमर्थ है देने में उस परम को कोई न...

Latest Posts

Hath Pakdo Mere Nath - हाथ पकड़ो मेरे नाथ

Hey Dhara ! Ro Mat - हे धरा ! रो मत

Supno--सुपनो

Aravali Hai Meri Jaan – अरावली है मेरी जान

Kahta Hai Tu Mujhe Bhagwan!- कहता है तू मुझे भगवान !

Mat Kahe Anshi Mere! Mai Tujh Se Milta Nahin -मत कहे अंशी मेरे ! मैं तुझ से मिलता नहीं

Prani Ka Pran Hoon Mai–प्राणी का प्राण हूं मैं

Mrityu – मृत्यु

Kahne Ko Bheed Hai–कहने को भीड़ है

Ghas Phoons Ki Jhonpadi Meri – घास– फूंस की झोपड़ी मेरी