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Ishwar Hai Annant – ईश्वर हैं अनन्त

ईश्वर है अनन्त  अनन्त की गोद में  होता है आदि और अन्त  रचे गए उनकी गोद में बैठकर  अलग– अलग  पंथ के धार्मिक ग्रन्थ  और  अपनी - अपनी मान्यतानुसार  धार्मिक स्थान  पाता है  जहां ईश्वर की गोद में अपना पथ छोड़ो मतभेद की हठ  ईश्वर की गोद में बैठ कर मुक्ति पाओ  चाहे जीकर और  चाहे मरकर  झटपट  ईश्वर है निकट देख अनन्त को  थोड़ा सा  अपनी अंतर्दृष्टि से आत्मज्ञान के पन्नें  पलट  चहुं दिशाओं में खड़े मिलेंगे  परम पिता परमेश्वर हैं जो बड़े नटखट। मौलिक रचयिता:– नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत)

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Akshar Me Hai Brahm Ka Naad- अक्षर में है ब्रह्म का नाद

Badla - बदला

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Supno--सुपनो

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Kahta Hai Tu Mujhe Bhagwan!- कहता है तू मुझे भगवान !

Mat Kahe Anshi Mere! Mai Tujh Se Milta Nahin -मत कहे अंशी मेरे ! मैं तुझ से मिलता नहीं

Prani Ka Pran Hoon Mai–प्राणी का प्राण हूं मैं