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Dharmik Punrajagran - धार्मिक पुनर्जागरण

बारूद बना खंजर  बनाया जिसने धरा को बंजर  इसके साथ खड़े नहीं होते  जो कहते हो अपने आपको नारी और नर नहीं देते वो आने वाली पीढ़ियों को बारूद से बनाकर अस्त्र  पेश करे हर तरफ सर्वनाश का जो मंज़र बेख़बर की रखता है हर ख़बर  वो और कोई नहीं  हे वो धार्मिक पुनर्जागरण का रहबर । मौलिक रचयिता:– नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत)

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Badla - बदला

Charachar Hai Anam- चराचर है अनाम

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Hey Dhara ! Ro Mat - हे धरा ! रो मत

Supno--सुपनो

Aravali Hai Meri Jaan – अरावली है मेरी जान

Kahta Hai Tu Mujhe Bhagwan!- कहता है तू मुझे भगवान !

Mat Kahe Anshi Mere! Mai Tujh Se Milta Nahin -मत कहे अंशी मेरे ! मैं तुझ से मिलता नहीं

Prani Ka Pran Hoon Mai–प्राणी का प्राण हूं मैं

Mrityu – मृत्यु