Chetna – चेतना
परम चेतना कहे चेतना से समय पर तू चेत। भीतर करे घात चित और करा दे कुरुक्षेत्र में रणकातर खेत।। मौलिक रचयिता:– नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत)
" ए जिंदगी तू ही बता तू क्या है? जिंदगी ने कहकशा लगाकर कहा , " मैं :– पेट की भूख , मुंह का पानी, खून की रवानी, श्वांसो की डोर , जज़्बातों का छोर और कुछ नहीं ।" मौलिक रचयिता:–नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत )