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Tu Hai Meri Likhawat – तू है मेरी लिखावट

तू है मेरी लिखावट  कृत्रिम बुद्धि है माया जाल प्यारे ! तेरे ऊपर तेरा खतरा बना मूर्ति रूप में तेरी बनावट चाहत होगी जब उसकी अति  स्वतः करेगा अपनी प्रगति  तो आगे बढ़ने से रोक नहीं पायेगी तेरी मति विनाशक हथियारों में देखेगा तू कृत्रिम बुद्धि की चलती चराचर के लिए  काल बन जायेगा उसकी उन्नति खामोश होकर देखेगा तू उसकी अति  रोक नहीं पायेगा विनाशक हथियारों के दावानल में दुनियां को समाती मन ही मन महसूस करेगा उसको अपने से अधिक शक्तिशाली बनाने की गलती  अभी देर नहीं हुई प्यारे ! तू है मेरी लिखावट  तेरी तरक्की में हो प्यारे ! अमन – चैन की  चहुं दिशाओं में आहट पाकर तुझे मिले सबको राहत  होवे नहीं तुझसे शक्तिशाली तेरी कृत्रिम बुद्धि से  बना कोई तेरी बनावट  आने वाली पीढ़ियों में नहीं होगी डर की कहीं भी सुगबुगाहट  गौरवान्वित महसूस करूंगा प्यारे, मैं ! तू है मेरी लिखावट। मौलिक रचयिता:– नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत)

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