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Akshar Me Hai Brahm Ka Naad- अक्षर में है ब्रह्म का नाद

अक्षर में  है ब्रह्म का नाद मत कर खड़ा अक्षर अक्षर  में  विवाद अक्षर लेता है करवट ब्रह्म देता है सृष्टि को बनावट  अक्षर से शब्द शब्द से विचार विचार से नाद नाद में ब्रह्म का आह्लाद  अक्षर  है बस  शक्ति एक उसके नाद में ब्रह्म प्रकाश को देख  छोड़ दे निकालना मीनमेख नमन कर प्यारे घुटने टेक अक्षर में है ब्रह्म का नाद  अक्षर है शान्ति का प्रसाद अक्षर से होती है सृष्टि  अक्षर से है परम आनन्द की वृष्टि  अक्षर है प्राण अक्षर है शाश्वत ज्ञान अक्षर का कर मान अक्षर में है ब्रह्म विराजमान अक्षर में है समाधान अक्षर में है विज्ञान  अक्षर से दूर होता है अज्ञान अक्षर से होता है ब्रह्म का आह्वान मौलिक रचयिता:– नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत)

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