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Pal Pal Ki Khabar- पल पल की खबर

पल पल की खबर  जो रखता है वो और कोई नहीं  वो है परम पिता परमेश्वर  दरिया की मंज़िल है समन्दर  समन्दर से टकराता है दिनकर भाप  को बनना है बादल बादल  चलता है  तन तन कर समेटे हुए जल की बूंदों का समन्दर  बरसता है सहसा  पर्वत की चोटियों से टकराकर निकल पड़ता है फिर दरिया बनकर मीठे पानी को चखता है मनुज अपनी अंजुली भरकर पास -पास  मनुज बनाते है  अपने–अपने घर होता नहीं वहां  किसीको किसीसे से  किसी प्रकार का डर शांत वातावरण में  करता है  हर कोई  विचरण  पल पल की खबर  जो रखता है  वो और कोई नहीं  वो है परम पिता परमेश्वर  करता नहीं  जो मनुज – मनुज में अंतर लगे नहीं किसीको किसीसे नजर दिखे  नहीं  परमेश्वर को हताहतों का कोई  मंजर । मौलिक रचयिता:– नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत)

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