Chetna – चेतना

 



परम चेतना कहे चेतना से समय पर तू चेत।

भीतर करे घात चित और करा दे कुरुक्षेत्र में रणकातर खेत।।


मौलिक रचयिता:– नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत)

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