Tu Hai Mera - तू है मेरा
तू है मेरा
फिर किस डर ने तुझे घेरा ?
परम पिता परमेश्वर है तेरा
दूर करके रख दूंगा
मन में जो व्याप्त है तेरे अंधेरा
किसी भी विधि से करता है
तू मुझसे बात
उठेगा वर देने हेतु सदा तुझे मेरा हाथ
भीतर तो देख जरा
मेरे को पायेगा हर पल साथ
मैं ही हूं नाथों का नाथ
करता नहीं
कभी किसीको अनाथ
नर में देख नारायण
भीतर उतरेगी भगवद गीता और रामायण
भीतर होता रहता है
श्वांस कर हर श्वास से मिलकर मंत्रोचारण
मैं ही हूं नाद
लेता है जब प्रेम से तू मेरा नाम
पाता हूं उसमें
तेरे हाथों लगा मुझे छप्पन भोग का प्रसाद
करुणा को भीतर समाहित कर
मनाता है जब तू मेरे लिए पर्व
महसूस करता हूँ
बैठ भीतर तेरे अपनी श्रेष्ठ कृति पर गर्व
जीवन है थोड़ा
क्यों चलाता है मानवता पर हथौड़ा ?
तू ने जब अपने आपको मेरी ओर मोड़ा
शांति को पाएगा तब तेरा चंचल घोड़ा
गले लगाने हर इंसान को
आगे बढ़ेंगे जब –जब तेरे कदम
पाएगा साथ मुझे तब – तब खड़ा हरदम
तू है मेरा
फिर किस डर ने तुझे घेरा ?
परम पिता परमेश्वर है तेरा
दूर करके रख दूंगा
मन जो व्याप्त है तेरे अंधेरा
होगा फिर नया सवेरा।
मौलिक रचयिता:– नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत)

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