Jhula jhule sanwariya - झूला झूले सांवरिया



झूला झूले सांवरिया 

हृदय में आकर आप बिराजिया

लता और पत्ता बनी झूले की डोरियां 

झूला झुलावे श्री जी के संग आपको बृज की गोपियाँ 


झूला झूले सांवरिया 

दुर्योधन के मेवा त्यागे 

श्री मुख से साग विदुर घर खाया

चहुं दिशाओं में भक्त का मान बढ़ाया 


झूला झूले सांवरिया 

बन कर सारथी पार्थ का

कुरुक्षेत्र में देकर उपदेश गीता का 

अधर्म को  हराने गांडीव को उठवाया 


झूला झूले सांवरिया 

चेतना को भेज कर पुष्पक विमान !

अपने में समाया 

प्रियजनों को सौंप कर जड़ देह को

मंत्रोच्चार से पंच तत्वों में मिलवाया ।



मौलिक रचयिता:– नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत)

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