Karvat - करवट
करवट में जीने का मजा है
वो मजा ठहराव में कहीं नहीं है
मौसम भी लेता है करवट
ठहर जाए एक जगह तो
प्रकृति भी श्रृंगार कर पाती नहीं है
बचपन भी लेता है करवट
नहीं ले पाए अगर करवट
तो जीवन भी
उछल – उछल के अलग – अलग
अवस्था में उमड़ने का मजा
ले पाता नहीं है
सदियों तक धरा के गहरे तल में
लकड़ी दब कर अगर करवट ना ले तो
कोयले से हीरा बन पाती नहीं है
उसको अमूल्य रत्न में
गिनता कोई नहीं है
जिस्म का घाव
दवा से ठीक होकर अगर करवट ना ले तो
डॉक्टर को
पूछता कोई नहीं है
वृक्ष के पतझड़ आने के बाद
करवट लेकर हरा – भरा नहीं हो तो
धरा पर उसे खड़ा
छोड़ता कोई नहीं है।
मौलिक रचयिता :– नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत)



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