Aravali Hai Meri Jaan – अरावली है मेरी जान



अरावली है मेरी जान 

जग की है ये पुरातन शान 

मत करो इसे पूंजीपतियों को दान

सुनी है इसने वीरों के घोड़ों के  टापौ की तान 


इर्द गिर्द सुनाई देते है जौहर के गान

अपने आंचल में समेट कर रखा भारत का मान

शरणागत के बचाएं इसने प्राण

हमीर हो गए इसकी वादियों में कुर्बान


अरावली नहीं है केवल पहाड़

इसमें है समाहित वीरों की दहाड़ 

रक्षा में टूटा है इसके वीरों का एक–एक हाड़ 

बना रखी थी उन्होंने इर्द गिर्द अपनी मांद 


जाग भारत मेरे !

अरावली ने नहीं आने दी तुम पे जरा सी भी आंच

भर्तृहरि ने दिए मंत्र करके  यहाँ अपना कठिन जाप

कलियुग टोह ले रहा  इसका सौ मीटर में नाप

देखा हो  जिसने धरातल का घोर ताप

मलहम  बन दूर किया पीढ़ियों का संताप


पेश करो बुद्धिजीवियों  एक नजीर

मत लिखों  सर्वनाश की तकदीर

अरावली से छलक रहा है नीर

नीर मिलता रहे पीढ़ियों को मत काटो इसका चीर !


मौलिक रचयिता:– नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत)

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