Dharmik Punrajagran - धार्मिक पुनर्जागरण



बारूद बना खंजर 

बनाया जिसने धरा को बंजर 

इसके साथ खड़े नहीं होते 

जो कहते हो अपने आपको नारी और नर

नहीं देते वो आने वाली पीढ़ियों को

बारूद से बनाकर अस्त्र 

पेश करे हर तरफ सर्वनाश का जो मंज़र

बेख़बर की रखता है हर ख़बर 

वो और कोई नहीं 

हे वो धार्मिक पुनर्जागरण का रहबर ।


मौलिक रचयिता:– नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत)

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