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" ए जिंदगी तू ही बता तू क्या है? जिंदगी ने कहकशा लगाकर कहा , " मैं :– पेट की भूख , मुंह का पानी, खून की रवानी, श्वांसो की डोर , जज़्बातों का छोर और कुछ नहीं ।" मौलिक रचयिता:–नरेन्द्र सिंह राठौड़ (भारत )
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Barood pe khana pak raha hai–बारूद पे खाना पक रहा है
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Chaar Deewarein Nahin Hain, Hai Yah Mera Ghar-चार दीवारें नहीं हैं, है यह मेरा घर
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